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कंप्यूटर और इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं तो जाने 5 ऑनलाइन थ्रेट्स और उनके समाधान

जैसे जैसे दुनिया में कंप्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ रहा है उसके साथ ही इंटरनेट पर खतरा भी बढ़ता जा रहा हैं. हर दिन हमें नए ऑनलाइन खतरों से दोचार होना पड़ता है. आइए जानते हैं इंटरनेट पर मौजूद 5 बड़े खतरों के बारे में और कैसे बचा जा सकता है इन खतरों से.

1. वायरस:   हैकर्सहर सेकेंड्स नए वायरस बना कर इंटरनेट के जरिए लोगों के कंप्यूटर और मोबाइल में भेजते हैं. यह खतरनाक वायरस बैंक अकाउंट से लेकर फेसबुक, जीमेल के पासवर्ड भी उड़ा ले जाते हैं. दुनिया भर में हर रोज ऐसे हजारों मामले सामने आते हैं जहां हैकर्स पासवर्ड उड़ा कर अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देते हैं.
कैसे बचें:  वायरस से बचने का सबसे आसान तरीका अपने कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर को लगातार अपडेट रखना है. पायरेटेड विंडो और पायरेटेड सॉफ्टवेयरों के इस्तेमाल से बचें. फ्री एंटीवायरस के बजाए पेड एंटीवायरस का इस्तेमाल करें .. 

2 मालवेयर:    मालवेयर का मतलब वैसे सॉफ्टवेयर हैं जो सिक्योरिटी वेरीफाइड नहीं होते हैं और आपके कंप्यूटर और मोबाइल को नुकसान पहुंचाते हैं. यह सॉफ्टवेयर बिना आपकी जानकारी के आपकी डिवाइस में इनस्टॉल हो जातेहैं और आपका डेटा चोरी करते हैं.
कैसे बचें:  इनसे बचने के लिए आपको कोई भी सॉफ्टवेयर इनस्टॉल करने से पहले काफी सतर्क रहने की जरूरत है. किसी भी सॉफ्टवेयर इनस्टॉल करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें की वह वेरीफाइड पब्लिशर का है या नहीं.

3. DDoS अटैक:’  डिनायल ऑफ सर्विस अटैक’ इंटरनेट के जरिए किया जाने वाले सबसे खतरनाकहमला है. हैकर्स इस तकनीक का इस्तेमाल करके एफबीआई और मोसाद जैसी दुनिया की बड़ी सुरक्षा एजेंसियों की वेबसाइट तक हैक कर चुके हैं. इस अटैक के जरिए हैकर्स आपका डेटा डायरेक्ट चोरी नहीं करते बल्कि इंटरनेट के ट्रैफिक को बढ़ा कर किसी भी वेबसाइट को स्पैम से भर देते हैं जिससे उस वेबसाइट को खोलने वाला व्यक्ति का भी डेटा चोरी हो सकता है.
कैसे बचें: DDoS अटैक से बचने के लिए राउटर के फायरवाल में फिल्टरिंग को इनेबल कर लें. कंप्यूटर का फायरवाल हमेशा औन रखें साथ ही आप थर्ड पार्टी फायरवाल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. DDoS अटैक से बचने के लिए आप अपने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर की भी मदद ले सकतेहैं. अगर आप अपनी वेबसाइट को इस अटैक से सुरक्षित करना चाहते हैं तो DDoS स्पेशलिस्ट को हायर कर सकते हैं.

4. फिशिंग:  फिशिंग एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए हैकर्स आपके कंप्यूटर और मोबाइल पर मेल, चैट और पॉपअप ऐड के जरिए फेक लॉगइन पेज भेजते हैं जो बिल्कुल ओरिजिनल लॉग इन पेज जैसा दिखता है. आप जैसे ही उस लॉगइन पेज पर अपना यूजर नेम और पासवर्ड डालेंगे आपकी आईडीऔर पासवर्ड हैकर्स तह पहुंच जाता है और वो आसानी से आपका अकाउंट खोल सकते हैं.
कैसे बचें: फिशिंग से बचने के लिए आप जब भी इंटरनेट पर वेबसाइट खोलें वेबपेज के URL के आगे HTTPS लगा लें. ऐसा करने पर फेक लॉग इन पेज आपके ब्राउजर में नहीं खुलेगा. अंजान इमेल का अटैचमेंट्स ना खोलें और उन्हें स्पैम मार्क कर दें.


5. सोशल मीडिया अटैक:  सोशल मीडिया अटैक इन दिनों हैकरों का सबसे फेवरेट तरीका बन गया है.फेसबुक, ट्विटर,गूगल प्लस जैसे सोशल मीडिया वेबसाइट पर स्पैम डालकर हैकर्स लोगों की ऑनलाइन एक्टिविटी को रीड करके उनसीजूड़ी अहम जानकारियां चोरी करते हैं फिर उन्हें एडवरटाइजिंग एजेंसियों को मोटे पैसों में बेच देते हैं.
कैसे बचें:  सोशल मीडिया पर अपनी प्रोफाइल मेंप्राइवेसी बढ़ा लें. अनजान व्यक्ति का फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने से बचें. अगर सोशल मीडिया पर आपका पेज है तो उसमें कीवर्ड्स ब्लॉकिंग मेथड का इस्तेमाल करें और सपैमर्स को ब्लॉक कर दें.

Updated: 08/10/2015 — 5:12 pm

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